अति सर्वत्र वर्जयेत्
अति सर्वत्र वर्जयेत्
अर्थ: किसी भी कार्य, वस्तु या व्यवहार में अति (अत्यधिकता/सीमा से अधिक होना) बुरी होती है। हर काम मर्यादा और संतुलन में ही किया जाना चाहिए।
वाक्य प्रयोग: पढ़ाई करना अच्छी बात है, लेकिन सेहत का ध्यान रखे बिना लगातार जागना सही नहीं है; याद रखो, अति सर्वत्र वर्जयेत्।