बोर्ड एग्जाम में अब आप भी ला सकते हैं 90 से ज्यादा नंबर, जानिए कैसे? How to get 90+ marks in board exams?

छात्र बोर्ड एग्जाम को लेकर हमेशा टेंशन में रहते हैं, लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं है। थोड़ी सी प्लानिंग और रणनीति के साथ आप बोर्ड परीक्षा में अच्छे मार्क्स ला सकते हैं। फिर चाहे वो सीबीएसई का एग्जाम हो, बिहार बोर्ड हो, यूपी बोर्ड, राजस्थान बोर्ड, एमपी बोर्ड हो या कोई और। इस आर्टिकल में एक्सपर्ट से जानिए ऐसे ही प्वाइंट्स।

 बोर्ड एग्जाम में अच्छे मार्क्स लाना इतना मुश्किल भी नहीं, जितना हम समझ लेते हैं। बस तैयारी से लेकर एग्जाम हॉल तक, आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना है। खास तौर से क्लास 10 के छात्र जो पहली बार बोर्ड एग्जाम दे रहे हैं, उन्हें डर लगना एक नॉर्मल सी बात है। इस वजह से वो कई बार एग्जाम में उतना अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाते, जितना कि कर सकते हैं। सबकुछ आते हुए भी या तो सवाल छूट जाते हैं, या फिर उत्तर सही से नहीं लिख पाते। नतीजा.. मार्क्स कट जाते हैं। जबकि वो 90+ स्कोर कर सकते हैं।

काक चेष्टा, बको ध्यानं... यह श्लोक हम सभी को छात्र जीवन में पढ़ाया जाता है। लेकिन इसके मायने को सही तरह से अपने जीवन में उतारने वाले को ही सफलता मिल पाती है। नींद, आहार, ध्यान, चेष्टा और गृह त्याग को भले ही विद्यार्थी के मूल पांच लक्षणों में गिना गया है, लेकिन इसके साथ ही कुछ और बातें और आदतें हैं जिन्हें एक छात्र के लिए अपनाना बेहद जरूरी है। जीवनशैली में बदलाव एक स्वस्थ्य जीवन के लिए जितना जरूरी है, उतना ही एक छात्र जीवन के लिए भी है। आज के दौर में खराब जीवनशैली हर तरीके से सिर्फ नुकसान के दरवाजे ही खोल रही है। विद्यार्थी के जीवन के पांच लक्षण उस जमाने की बातें हैं, जब आम नागरिक की जीवनशैली सही दिशा में हुआ करती थी। लेकिन आज के दौर में इन के अलावा भी कुछ बातों का खास ख्याल रखना जरूरी है:

नॉलेज के बावजूद बोर्ड एग्जाम में मार्क्स न कटें और आप हर विषय में ज्यादा से ज्यादा अंक हासिल कर सकें, इसके लिए आपको अपने बोर्ड टाइम में क्या करना चाहिए, बता रहे हैं एक्सपर्ट।

अच्छे अंक लाने के प्रमुख तरीके:

1.NCERT को प्राथमिकता: 
बोर्ड परीक्षा के अधिकांश प्रश्न NCERT किताबों से सीधे पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें गहराई से समझें।

2.सिलेबस और पैटर्न समझें: 
परीक्षा से पहले पाठ्यक्रम और पेपर का प्रारूप (Marks Distribution) जान लें, ताकि महत्वपूर्ण टॉपिक्स पर ध्यान दिया जा सके।
टाइम-टेबल और रिवीजन: एक संतुलित टाइम-टेबल बनाएं। प्रतिदिन पढ़ाई के साथ-साथ पुराने विषयों का रिवीजन करना बहुत जरूरी है।

3.टाइम टेबल: 
अगर आप एग्जाम में अच्छे मार्क्स लाना चाहते हैं तो सबसे पहले एक टाइम टेबल बनाएं। कितनी देर पढ़ाई करनी है, कब ब्रेक लेना है, कब खाना है, कब आराम करना है, ये सब जरूरी है। नींद पूरी करनी भी जरूरी है, ताकि आप अगले पूरे दिन फ्रेश रहें और जो पढ़ें वो दिमाग में समा सके।

4. नोट्स बनाएं: 
कुछ नया पढ़ रहे हों या रिवीजन कर रहे हों, नोट्स बहुत जरूरी है। इससे न सिर्फ आपको लास्ट मिनट के लिए जरूरी प्वाइंट्स मिल जाते हैं, बल्कि लिखने की अच्छी प्रैक्टिस भी होती है। साथ ही साथ टॉपिक बेहतर समझ आता है और ज्यादा समय तक याद रहता है।

5. रिवीजन:
 आपने जो कुछ भी पढ़ा है उसको समय-समय पर रिवाइज करते रहें। रिवीजन करने से हमारी मेमोरी अच्छी होती है और एग्जाम देते समय सवाल देखकर पढ़ी हुई चीजें रीकॉल करने में आसानी होती है।

6.पुराने प्रश्न पत्र और सैंपल पेपर: 
बच्चा छोटा हो या बड़ा, उसकी क्लास के पिछले सालों के प्रश्न पत्र अगर आपको मिल जाते हैं तो बच्चे को लिखने की प्रैक्टिस कराने का ये सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। बच्चे को बिल्कुल व्यवस्थित कमरे में, परीक्षा वाले समय के भीतर इन पेपर को हल करने के लिए दें। अगर प्रश्न पत्र नहीं मिलते हैं तो पुराने छात्रों से पूछकर इस प्रश्न पत्र को कॉपी पर तैयार कर दें और फिर बच्चे से उसे तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए कहें। इस तरह से आपको और बच्चे को उसकी राइटिंग स्पीड और समझकर लिखने की क्षमता का अंदाजा हो जाएगा। कई बार ऐसा करने से बच्चे में लिखने को लेकर डर भी कम होगा।  

7.उत्तर लेखन अभ्यास (Answer Writing): उत्तरों को सुव्यवस्थित और स्पष्ट रूप से लिखने का अभ्यास करें। डायग्राम और पॉइंट्स का उपयोग करें।

8.मॉक टेस्ट प्रैक्टिस: 
बीच-बीच में घर पर खुद वैसे ही परीक्षा दें जैसे की आप बोर्ड में बैठे हों। जैसे एक विषय का पिछले साल का प्रश्न पत्र ले लें। जैसे बोर्ड एग्जाम में 15 मिनट पेपर पढ़ने के लिए और 3 घंटे उत्तर लिखने के लिए मिलते हैं, वैसे ही घर पर बिना किसी डिस्टर्बेंस के टेस्ट प्रैक्टिस करें। एग्जाम का समय भी वही चुनें। इससे आपको दिन के उन घंटों में एक्टिव रहने की आदत पड़ जाएगी और एग्जाम देते समय आपको नींद या आलस का सामना नहीं करना पड़ेगा।

9.व्यवस्थित बनें:
व्यवस्थित बनने से आप अपने काम पर ज्यादा बेहतर तरीके से ध्यान दे सकते हैं। साथ ही इससे ध्यान भटकने से भी बच जाता है।  बच्चे को ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। शुरुआत टेबल और किताबों की अलमारी से करें। बच्चे को सभी सामान को उनके इस्तेमाल के हिसाब से सही तरह से लगाने और पढ़ने वाली जगह को साफ-सुथरा रखने के लिए कहें। साथ ही रोज का शेड्यूल तैयार करें और काम के लिए समय सीमा भी तय करें। इससे बच्चा अपने लक्ष्य को निर्धारित समय पर पूरा करना सीखेगा। साथ ही शेड्यूल होने से उसे पता होगा कि किस विषय को उसे प्राथमिकता देनी है। इसके साथ ही दिन भर में उन सभी समय को पहचानें, जब बच्चा सबसे ज्यादा अच्छी तरह से पढ़ाई कर पाता है। इसे पहचानने के बाद टाइम टेबल में जरूरी बदलाव लाएं। 

10.स्टडी प्लान(किस विषय को कितना टाइम):
 हर सब्जेक्ट को उसके वेटेज और टफनेस लेवल के अनुसार टाइम दें। जो ज्यादा मुश्किल लगता है, उसे ज्यादा समय दें। बोर्ड की डेटशीट/ टाइम टेबल के हिसाब से तय कर लें कि किस सब्जेक्ट के टॉपिक को पहले पढ़ना है और किसे बाद में।
बच्चे को एक खास स्टडी प्लान बनाकर पढ़ाएं या खुद पढ़ने के लिए कहें। इस स्टडी प्लान में कुछ देर लिखने का काम, कुछ देर  रिवीजन और कुछ देर र्रींडग शामिल कर लीजिए। इस स्टडी प्लान को खासतौर पर परीक्षा के पहले बना कर लागू करें। इससे बच्चा स्कूल जाकर परीक्षा देने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा क्योंकि वो पढ़े हुए का रिवीजन तो कर ही रहा है, वो इसको लिखकर भी देख रहा है वो भी पूरी प्र्लांनग के साथ। इस दौरान लिखने की आदत के लिए आप बच्चे से एक पेज रार्इंटग भी करवा सकती हैं। साथ में उसे प्रैक्टिस पेपर भी तैयार करके दीजिए। 

11.सुनना सिखाएं
अगर आप चीजों को ज्यादा बेहतर तरीके से बच्चे को समझाना चाहती हैं तो सबसे पहले आपको बात को पूरा सुनने की आदत उसमें  डालनी होगी। अगर टीचर के पढ़ाने पर बच्चे के मन में सवाल आ भी रहे हैं तो उन्हें एक जगह लिखने के लिए बच्चे को कहें। टीचर की बात पूरी होने पर आप अपने सवाल पूछ सकता है। बच्चे को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करें। कई बार हमारे सवालों के जवाब बात पूरी होते होते हमे मिल ही जाते हैं। बात को सुनने का मतलब यह भी है कि आपका ध्यान पूरी तरह से सामने वाले की बात पर हो। ध्यान को यहां वहां भटकाने से आप विषय से भटक सकते हैं। बच्चा जब ध्यान से क्लास में टीचर की कही बातों को सुनने लगेगा तो उसकी आधाी तैयारी क्लास रूम में ही होने लगेगी।

12. पॉजिटिव थिंकिंग:
 हमारे जीवन में क्या होता है, इसमें हमारी सोच की बड़ी भूमिका होती है। आप जैसा सोचेंगे, वैसी ऊर्जा आकर्षित करेंगे। इसलिए कहते हैं कि हमेशा अच्छा सोचो, पॉजिटिव सोचो। इससे न सिर्फ आपको अपनी तैयारी पर फोकस करने में मदद मिलती है, बल्कि कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है।

13. हेल्दी फूड: 
एग्जाम के दौरान आपकी डायट में प्रोटीन अधिक होना चाहिए। आप हरी सब्जियां और ताजा फल खाएं। कुछ दिनों तक जंक फूड से बिल्कुल दूर रहें। खाना थोड़ी थोड़ी देर पर खाएं लेकिन कम-कम ही खाएं। एक बार में ज्यादा खाने से नींद आएगी।

14. गैजेट को बोलो नो: 
मोबाइल, कम्प्यूटर, टीवी से जितना हो सके दूर रहें। अगर आप ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, सिर्फ तभी लैपटॉप या मोबाइल फोन का इस्तेमाल करें। ऑनलाइन गेमिंग या सोशल मीडिया ब्राउज करने में समय बर्बाद न करें।

15.स्वास्थ्य का ध्यान: 
पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) लें और स्वस्थ भोजन करें। स्वस्थ दिमाग से ही अच्छी पढ़ाई संभव है।

16.तनाव मुक्त रहें: 
आत्मविश्वास बनाए रखें और सकारात्मक सोचें। सोशल मीडिया से दूरी बनाकर एकाग्रता बढ़ाएं। 

18.पढ़ाई के बेहतर तरीके अपनाएं:
आप अपने बच्चे को आधुनिक तकनीकों की मदद से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। इसके लिए आप उसे यट्यूब पर उपलब्ध वीडियो देखने की सलाह दे सकती हैं। साथ ही कुछ ऐसे तरीके हैं जो आमतौर पर सभी के लिए काम कर जाते हैं जैसे विषय को पढ़ाने की कोशिश करना। ये आप खुद के साथ या किसी और के साथ भी कर सकते हैं। विषय पर फ्लो चार्ट बनाना, छोटे नोट्स या प्वाइंटर्स बनाना, खुद से सवाल करना आदि।