भारत की शिक्षा प्रणाली और AI

ऐसे वक़्त में, जब मोबाइल की पहुंच बढ़ी है, ग्रामीण, आदिवासी और कम संसाधन वाले तबकों में एआई-संचालित शिक्षा के लिए स्कूली बुनियादी ढांचे का अभाव और घरों पर एक समान सुविधाएं न होने संबंधी चुनौतियां भी बनी हुई हैं. इन कमियों का मतलब है कि एआई को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करना (ख़ासकर छात्रों के लिए) केवल स्कूली ढांचे पर निर्भर नहीं रह सकता, घरों में मौजूद मोबाइल फोन का लाभ उठाकर इसे अधिक व्यापक बनाया जा सकता है. 

हालांकि, इससे जुड़ी चुनौतियां भी हैं, जैसे डिवाइस शेयरिंग, संसाधनों की पहुंच में लैंगिक विभाजन, डिजिटल निरक्षरता, बिजली या इंटरनेट को लेकर अनिश्चितता, और निजता संबंधी चिंताएं.

AI ने दुनियाभर में एक क्रांति लाने का काम किया है। इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के अलावा हर क्षेत्र में  AI मजबूती के साथ दाखिल हो चूका है।  AI की मदद से किसी भी काम या प्रोसेस को बहुत आसानी से और बेहतर तरीके से किया जा सकता है। 
अगर हम शिक्षा क्षेत्र का ही उदहारण लें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कोई भी छात्र किसी भी विषय को आसानी और आधुनिक तरीके से सीख सकता है। AI की मदद से कंप्यूटर ऐसे काम करने में सक्षम है जिस काम को करने के लिए अमूमन मानवीय बुद्धिमत्ता की आवश्यकता होती है।

भारत के पास अपने शिक्षा-संकट से उबरने का अवसर है- एआई इन चुनौतियों को दूर कर सकता है, शिक्षण को व्यक्तिगत, और शैक्षिक समानता को व्यापक बना सकता है.

ऑटिज़्म और कमज़ोर पठन कौशल वाले बच्चों की सहायता के लिए कई AI एप का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जैसे- स्क्रीनिंग टूल फॉर ऑटिज़्म रिस्क यूज़िंग टेक्नोलॉजी (START) ऐप, जिसके माध्यम से वे लोग भी ऑटिज़्म का पता कर सकते हैं, जो इसके विशेषज्ञ नहीं हैं. इसमें मोबाइल-आधारित बच्चों के कामों व माता-पिता के इनपुट का उपयोग किया जाता है. 

 लेकिन जिस तरह किसी टेक्नोलॉजी के फायदे होते हैं तो वहीं उसके नकारात्मक इस्तेमाल को भी नहीं नकारा जा सकता है। ठीक उसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अगर क्रांति लेकर आया है तो उसके दुष्प्रभाव से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

इन चुनौतियों से पार पाने और भारत के सभी बच्चों को एआई-संचालित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आठ सुझाव दिए जा सकते हैं. 
पहला, एआई नवाचारों को पहले ऑफलाइन उपयोग करना चाहिए, उनको कम बैंडविड्थ के साथ तैयार किया जाना चाहिए, ताकि इंटरनेट, कैशिंग कॉन्टेंट और जहां तक संभव हो सिंकिंग के बिना भी एआई उपकरण अच्छे से काम कर सकें. 
दूसरा, एप कमज़ोर गुणवत्तावाले वाले फोन पर भी काम करने चाहिए और इनपुट के रूप में आवाज, तस्वीर और छोटे आकार के फाइलों का प्रयोग किया जाना चाहिए. 
तीसरा, उन ग्राम केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों या स्थानीय स्कूलों में साझा सामुदायिक तंत्र बनाना चाहिए, जहां चार्जिंग स्टेशन हों और जिन घरों में इसकी कमी है, वहां ज़रूरी उपकरण लगाए जाने चाहिए. 
चौथा, लड़कियों और वंचित समूहों को प्राथमिकता देनी चाहिए, साथ ही उन्हें और उनके अभिभावकों को उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि वे भरोसे के साथ उसका प्रयोग कर सकें.
पांचवां, वंचित गांवों तक मोबाइल नेटवर्क (4G/5G) बढ़ाने और बिजली लगातार उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों में सौर ऊर्जा और बैटरी बैकअप की सुविधा लगानी चाहिए. 
छठा, स्कूलों में, शिक्षकों को ऐसे उपकरण देने चाहिए, जिनकी मदद से वे पाठ योजनाएं तैयार कर सकें, स्वचालित ग्रेडिंग मूल्यांकन कर सकें और समूह में गतिविधियां करा सकें. 
सांतवां, शिक्षकों की क्षमताएं भी सुधारनी होंगी, जिसके लिए ऐसे एआई उपकरण बनाने होंगे, जो उनके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चला सकें. IIT, मद्रास का ‘शिक्षकों के लिए एआई’ इसी तरह का एक प्रयास है. 
आठवां, नैतिक रूप से उत्तरदायी एआई ढांचा अनिवार्य है, जिसके लिए नीति आयोग के ‘जिम्मेदार एआई सिद्धांत’ के अनुसार ही गुमनाम डेटा, पूर्वाग्रह ऑडिट और ओपेन सोर्स का इस्तेमाल करना चाहिए।
 
शिक्षा में AI के मुख्य फायदे—
AI की मदद से सीखने की ज़रूरतों और अलग-अलग क्षमताओं वाले छात्रों के लिए पढ़ाई को और आसान बनाया जा सकता है। एक डेटा को अलग-अलग तरीके से और छात्रों के अनुरूप उसे प्रस्तुत करने में AI की मदद ली जा सकती है। साथ ही विकलांग, सीखने में अंतर या भाषा की बाधाओं  जैसी दिक्कतों को भी इसकी मदद से दूर किया जा सकता है।

1. निजीकृत अधिगम: AI छात्र की रुचियों और क्षमता के अनुसार शिक्षण सामग्री को अपनाता है।
2. शिक्षकों के लिए सहायता: AI स्वचालित ग्रेडिंग पाठ योजना और प्रशासनिक कार्यों को आसान बनाता है जिससे शिक्षक अधिक रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं।
3. समावेशिता: AI टूल विविध सीखने की आवश्यकताओं वाले छात्रों की मदद कर सकते हैं जिससे शिक्षा अधिक समावेशी हो जाती है।
4. बहुभाषी शिक्षा: AI सामग्री को विभिन्न भारतीय भाषाओं में तुरंत समझा सकता है जिससे भाषा की बाधा दूर होती है।
5. चुनौतियां और नैतिकता: डेटा गोपनीयता निष्पक्षता और एआई को 'सहायक' के रूप में उपयोग करना मानवीय शिक्षक के प्रतिस्थापन के रूप में महत्वपूर्ण है। 

शिक्षा में AI के नुकसान 
शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह छात्रों के मानसिक क्षमता और सीखने में बाधा उत्पन्न कर सकती है। छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अपने सवालों के जवाब आसानी से  ढूंढ सकते हैं। जिससे वो खुद से किसी सवाल के जवाब ढूंढने में पीछे रह सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में AI का उपयोग जवाबदेही, पारदर्शिता और निष्पक्षता से संबंधित कई और चुनौतियों को जन्म देता है।

इसके अलावा किसी भी टेक्नोलॉजी के साथ जो सबसे बड़ी समस्या होती है वो है, जरुरी डेटा का बचाव।  शिक्षा में भी इस बात का डर बना रहता है कि डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा मजबूत नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस छात्रों के व्यक्तिगत जानकारी, सीखने की प्रोफ़ाइल और व्यवहार पैटर्न के साथ ही छात्रों के हर तरीके के डेटा को इकट्ठा करता है। जिससे इस बात कर डर है कि इस डेटा का दुरुपयोग भी किया जा सकता है। इसलिए AI जैसी तमाम टेक्नोलॉजी के उपयोग के साथ हमें डेटा को सुरक्षित रखने पर भी ध्यान देने और काम करने की जरुरत है।

शिक्षा में एक उत्तरदायी एआई भविष्य के लिए सुझाव
इन सबके बावजूद, सीखाने के कामों में एआई के उपयोग से समस्याओं का कोई रामबाण इलाज नहीं किया जा सकता. यह किसी शिक्षक के कौशल की जगह नहीं ले सकता और बुनियादी ढांचे की कमियों से जुड़ी चिंताएं भी झुठलाई नहीं जा सकतीं. इसलिए, एआई की सहायता से सुधार तभी संभव हैं, जब उसे सोच-समझकर तैयार किया जाए, नियंत्रित किया जाए और वास्तविक दुनिया की प्रणालियों से जोड़ा जाए. समय की यही मांग है कि एआई को पठन-पाठन के कामों में शामिल किया जाए, लेकिन सुरक्षा के उसमें पर्याप्त उपाय हों, वे शैक्षिक समानता के लक्ष्यों के अनुरूप हों और शिक्षकों की सोच पर आधारित हों.

भारत में AI का भविष्य —
भारत NEP 2020 को लागू करने और बुनियादी शिक्षण सुधारों को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, AI एक अभूतपूर्व अवसर हमें मुहैया करता है. इससे न केवल विषय-वस्तु को सुधारने में, बल्कि हर बच्चे के सीखने के तरीके को पूरी तरह बदलने में हमें सफलता मिल सकेगी.

शिक्षा में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) व्यक्तिगत सीखने और 24/7 ट्यूटरिंग के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को बदल रहा है। यह शिक्षकों का बोझ कम करता है और छात्रों की क्षमता के अनुसार शिक्षा प्रदान करता है। भारत में दीक्षा (DIKSHA) जैसी डिजिटल पहल के जरिए AI-आधारित शैक्षिक संसाधन और शिक्षक प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।